नव-सृजन का नव-उत्सव
फागुन के गुजरते-गुजरते आसमान साफ हो जाता है, दिन का आँचल सुनहरा हो जाता है और शाम लंबी, सुरमई हो जाती है, रात बहुत उदार... बहुत उदात्त होकर उतरती है तो सिर पर तारों का थाल झिलमिलाता है। होली आ धमकती...
View Articleक्या करें नव-संवत्सर के दिन
घर को ध्वजा, पताका, तोरण, बंदनवार, फूलों आदि से सजाएँ व अगरबत्ती, धूप आदि से सुगंधित करें। दिनभर भजन-कीर्तन कर शुभ कार्य करते हुए आनंदपूर्वक दिन बिताएँ। सभी जीव मात्र तथा प्रकृति के लिए मंगल कामना...
View Articleनव-संवत्सर की शुभता
जैसे ईसा (अंग्रेजी), चीन या अरब का कैलेंडर है उसी तरह राजा विक्रमादित्य के काल में भारतीय वैज्ञानिकों ने इन सबसे पहले ही भारतीय कैलेंडर विकसित किया था। इस कैलेंडर की शुरुआत हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र...
View Articleनव संवत्सर में नवजीवन का संदेश
कहा जाता है कि ब्रह्मा ने सूर्योदय होने पर सबसे पहले चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सृष्टि की संरचना शुरू की। उन्होंने इसे प्रतिपदा तिथि को प्रवरा अथवा सर्वोत्तम तिथि कहा था। इसलिए इसको सृष्टि का प्रथम दिवस...
View Articleशुभ विक्रम नवसंवत्सर आरंभ
संसार की उत्पत्ति के साथ ही परिवर्तन जुड़ा हुआ है। सृष्टि के रचियता ने भी समय-समय पर विष्णुजी द्वारा सृष्टि की रचना का आदेश ब्रह्माजी को मिला और उन्होंने सृष्टि की रचना की। समय के साथ युग परिवर्तन...
View Articleचैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा
नवसंवत्सर का त्योहार चिर प्राचीनकाल से भारत में प्रचलित है। भारतीय नववर्ष का प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है। नए वर्ष का प्रथम दिन होने के नाते यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। वेदों से सृष्टि...
View Articleनववर्ष की शुभ शुरुआत का दिन
गुड़ी पड़वा की सुबह हर किसी के जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर आएगी और इसी के साथ नववर्ष की शुभ शुरुआत होगी। मराठी भाषी परिवारों में सूर्योदय के पूर्व गुड़ी बांधकर ईश्वर से सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी।...
View Articleगुड़ी पड़वा पर रहेगा भक्तिमय माहौल
23 मार्च से जहां हिंदू नववर्ष की शुरुआत होगी, वहीं महाराष्ट्रीयन परिवार इसे गुड़ी पाड़वा के रूप में मनाएंगे। इस अवसर पर सभी महाराष्ट्रीयन घरों में भक्तिमय माहौल रहेगा। देश भर के सभी समाज के लोग परंपरागत...
View Articleनवसंवत्सर पर कैसे करें पूजन
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवसंवत्सर का आरंभ होता है, यह अत्यंत पवित्र तिथि है। इसी तिथि से पितामह ब्रह्मा ने सृष्टि निर्माण प्रारंभ किया था। वस्तुतः नवसंवत्सर भारतीय काल गणना का आधार...
View Articleगुड़ी पड़वा : सृष्टि का जन्मदिवस!
अवसर है नवसृजन के नवउत्साह का, जगत को प्रकृति के प्रेमपाश में बांधने का। पौराणिक मान्यताओं को समझने व धार्मिक उद्देश्यों को जानने का। यही है नवसंवत्सर, भारतीय संस्कृति का देदीप्यमान उत्सव। चैत्र...
View Articleइतिहास के झरोखे में नवसंवत्सर
चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा वसंत ऋतु में आती है। वसंत ऋतु में वृक्ष, लता फूलों से लदकर आह्लादित होते हैं जिसे मधुमास भी कहते हैं। इतना ही यह वसंत ऋतु समस्त चराचर को प्रेमाविष्ट करके समूची धरती को विभिन्न...
View Articleवर्ष का सर्वोत्तम दिन गुड़ी पड़वा
हिन्दू पंचांग के बारह महीनों के क्रम में पहले चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा वर्षभर की सभी तिथियों में इसलिए सबसे अधिक महत्व रखती है क्योंकि मान्यता के अनुसार इसी तिथि पर ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना...
View Articleआइए... स्वागत करें नववर्ष का
पौराणिक ग्रंथों जैसे ब्रह्मपुराण, अथर्ववेद और शतपथ ब्राह्मण में ये माना गया है कि गुड़ीपड़वा पर ब्रह्मा ने सृष्टि के सृजन की शुरुआत की थी। यहीं से नवीन का प्रारंभ हुआ माना जाता है और नवीनता का उत्सव ही...
View Articleविश्वावसु संवत्सर : महानायक की सरकार
विश्वावसु नाम से प्रारंभ होने वाले इस संवत्सर में सभी प्रकार के सुख के साथ विकास व गुणात्मकता की वृद्धि के योग बनेंगे। राष्ट्र की नीति-रीति को प्रभावित करने में तकनीकीजन कलाकार, कौशल संपन्न वर्ग प्रमुख...
View Articleकैसा होगा नवसंवत्सर 2069 का वर्ष
वर्षारंभ में गुरुमान से विष्णुविंशति का विश्वावसु नामक संवत्सर है। इसका फल शास्त्रों में इस प्रकार है- विश्वावसु नामक संवत्सर में विश्व में भंयकर रोगों से आमजन परेशान रहते हैं। वर्षा भी मध्यम होती है।...
View Articleवर्ष प्रतिपदा एवं नव संवत्सर क्या है?
चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा या वर्ष प्रतिपदा कहते हैं, इस दिन हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है। पढ़ें गुड़ी पड़वा के बारे में संपूर्ण जानकारी गुड़ी पड़वा विशेष पर! चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की...
View Articleगुड़ी पड़वा : भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण त्योहार
हमारी भारतीय संस्कृति और हमारे ऋषियों-मुनियों ने गुड़ी पड़वा अर्थात चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नववर्ष का आरंभ माना है। गुड़ी पड़वा पर्व धीरे-धीरे औपचारिक होता चला जा रहा है। इसका व्यापक प्रचार-प्रसार...
View Articleनव संवत्सर के दिन कैसे करें पूजन?
गुड़ी पाड़वा या नव संवत्सर के दिन प्रातः नित्य कर्म कर तेल का उबटन लगाकर स्नान आदि से शुद्ध एवं पवित्र होकर हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प और जल लेकर देश काल के उच्चारण के साथ सुख समृद्धि प्राप्त होती है।
View Articleवर्षारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही क्यों?
शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही चंद्र की कला का प्रथम दिवस है। अतः इसे छोड़कर किसी अन्य दिवस को वर्षारंभ मानना उचित नहीं है। संवत्सर शुक्ल से ही आरंभ माना जाता है, क्योंकि कृष्ण के आरंभ में मलमास आने की...
View Articleप्रतिपदा को लेकर पौराणिक मान्यताएं
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नए वर्ष का आरंभ माना जाता है। ब्रह्म पुराण में ऐसे संकेत मिलते हैं कि इसी तिथि को ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना की थी। इसका उल्लेख अथर्ववेद तथा शतपथ ब्राह्मण में भी मिलता है।
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